Ganjdundwara news : गंजडुंडवारा: आधे घंटे की बारिश ने खोली पालिका के दावों की पोल, जलभराव से सड़कें बनीं 'तालाब'
गंजडुंडवारा: तीन साल के कार्यकाल में जलभराव की समस्या का नहीं निकाला हल, तालाब किनारे दुकानों के अवैध प्रोजेक्ट में उलझा रहा पालिका प्रशासन
रिपोर्ट मोरध्वज कुमार
UP R भारत एक्सप्रेस न्यूज़
गंजडुंडवारा। मंगलवार दोपहर आसमान से बरसी बारिश की बूंदें शहर के लिए राहत लेकर आई थीं, लेकिन नगर पालिका परिषद के दावों के लिए वही बूंदें सवाल बन गईं। बारिश शुरू होने के कुछ ही मिनटों में हनुमानगढ़ी चौराहा, सुदामापुरी रोड, थाना रोड और गांधी रोड पानी से लबालब हो गए। सड़कें गायब थीं, सिर्फ पानी दिखाई दे रहा था। राहगीर रास्ता नहीं, पानी की गहराई देखकर कदम बढ़ा रहे थे।
कहते हैं कि पहली बारिश किसी भी शहर की असली परीक्षा होती है। गंजडुंडवारा में भी यही हुआ। आधे घंटे की बारिश ने उन दावों की परतें उधेड़ दीं, जो पिछले तीन वर्षों के कार्यकाल में विकास के नाम पर किए जाते रहे।
अभी एटा रोड स्थित कांवड़ मार्ग पर गड्ढों की मरम्मत के नाम पर पीली मिट्टी डालने और विरोध होने पर उसी मिट्टी को दोबारा गड्ढों में भरने का मामला लोगों की जुबान से उतरा भी नहीं था कि तभी बारिश ने गंजडुंडवारा नगर पालिका की तैयारियों की एक और तस्वीर सबके सामने ला दी।
कस्बा वासियों ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में जलभराव की स्थायी समस्या के समाधान के लिए कोई प्रभावी योजना नजर नहीं आई। नालों की क्षमता बढ़ाने, जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने और बरसाती पानी के रास्ते साफ करने की बजाय पालिका प्रशासन लंबे समय तक तालाब किनारे दुकानों के प्रस्तावित प्रोजेक्ट में उलझा रहा। बाद में जिलाधिकारी के हस्तक्षेप के बाद उस प्रस्ताव को निरस्त करना पड़ा।
अब नगर के लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि यही ऊर्जा शहर को जलभराव से बचाने में लगाई जाती तो शायद आज यह तस्वीर न होती।
बारिश थम गई, लेकिन पीछे कई सवाल छोड़ गई। दुकानदार पानी निकालते रहे, राहगीर भीगते रहे और वाहन चालक रास्ता तलाशते रहे। उधर, शहर में व्यंग्य भी तैरता रहा— "गंजडुंडवारा में मानसून आते ही सड़कें नहीं, तालाबों का उद्घाटन हो जाता है।" किसी ने कहा, "यहां विकास के दावे बारिश से पहले बड़े दिखाई देते हैं और बारिश के बाद पानी में बह जाते हैं।"
फिलहाल पानी उतर जाएगा, सड़कें फिर दिखाई देने लगेंगी, लेकिन वह सवाल शायद नहीं उतरेगा, जो हर मानसून के साथ लौट आता है।



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