Kasganj news :बरौना गांव में बन रहे 'पक्का बांध' की गुणवत्ता पर उठे सवाल; ग्रामीणों में आक्रोश
कासगंज: बरौना गांव में बन रहे 'पक्का बांध' की गुणवत्ता पर उठे सवाल; ग्रामीणों में आक्रोश
रिपोर्ट मोरध्वज कुमार डायरेक्टर
UP R भारत एक्सप्रेस न्यूज़
कासगंज। जनपद की पटियाली तहसील के बरौना गांव में गंगा कटान और संभावित बाढ़ से बचाव के लिए सिंचाई विभाग द्वारा निर्माणाधीन ठोकर (पक्का बांध) विवादों के घेरे में है। ग्रामीणों और स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने निर्माण कार्य में बरती जा रही भारी अनियमितताओं को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं।
350 मीटर लंबे बांध से थी बड़ी उम्मीदें
गंगा के तेज बहाव को नियंत्रित करने और गांव को सुरक्षित रखने के लिए लगभग 350 मीटर लंबी पत्थरों की इस ठोकर का निर्माण शुरू किया गया है।
जो बाढ़ का दबाव नहीं झेल पाते थे। इस बार सरकार ने स्थायी समाधान के रूप में पक्का बांध स्वीकृत किया था, जिससे ग्रामीणों में सुरक्षा की एक नई उम्मीद जगी थी। इस परियोजना को 20 जून तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
तकनीकी मानकों की अनदेखी के आरोप
निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध शुरू हो गया है।नियम विरुद्ध कार्य: मानकों के अनुसार,सबसे पहले रेत से भरी बोरियों की मजबूत नींव बनाकर उन्हें नायलॉन जाल में व्यवस्थित रूप से बांधा जाना चाहिए, जिसके ऊपर पत्थरों की परत डाली जाती है।
लापरवाही: आरोप है कि मौके पर बिना बोरियों के ही सीधे रेत डाली जा रही है
और बोरियों का उचित उपयोग नहीं किया जा रहा है। इससे बांध की मजबूती पर सवालिया निशान खड़ा हो गया है।
शुक्रवार शाम वरिष्ठ समाजसेवी और अधिवक्ता अब्दुल हफीज गांधी ने बरौना गांव का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने निर्माण कार्य पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि गुणवत्ता से समझौता किया गया,
तो वही करोड़ों की यह परियोजना अपने उद्देश्य में विफल हो जाएगी और भविष्य में गांव पर कटान व बाढ़ का खतरा बरकरार रहेगा।
विभाग को पारदर्शिता और नियमित निगरानी सुनिश्चित करनी चाहिए। यदि लापरवाही जारी रही, तो इस मामले को उच्च स्तर पर उठाया जाएगा।" — अब्दुल हफीज गांधी
वही ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रशासन जल्द से जल्द दखल देकर निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कराए ताकि जनता के पैसे का दुरुपयोग न हो और गांव को बाढ़ से वास्तविक सुरक्षा मिल सके।

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