Kasganj news : गंजडुंडवारा: डिजिटल अरेस्ट के जाल में फंसे समाजसेवी, साइबर ठगों ने डरा-धमकाकर ठगे 31 लाख रुपये
गंजडुंडवारा: डिजिटल अरेस्ट के जाल में फंसे 75 वर्षीय स्वालेह अंसारी समाजसेवी, साइबर ठगों ने डरा-धमकाकर ठगे 31 लाख रुपये
रिपोर्ट, मोरध्वज कुमार डायरेक्टर
UP R भारत एक्सप्रेस न्यूज़
गंजडुंडवारा (कासगंज): साइबर अपराधियों ने अब गंजडुंडवारा में 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर एक बड़ी ठगी को अंजाम दिया है। कस्बे के एक 75 वर्षीय समाजसेवी स्वालेह अंसारी को सीबीआई (CBI) और एनआईए (NIA) अधिकारी बनकर डराया गया और करीब एक सप्ताह तक मानसिक दबाव में रखकर उनसे 31 लाख रुपये हड़प लिए गए।
साइबर अपराधियों ने कैसे बुना गया ठगी का जाल?
दरसल आपको बता दे की कासगंज जनपद के गंजडुंडवारा मोहल्ला खैरू निवासी स्वालेह अंसारी (75) को 12 मार्च से 19 मार्च 2026 के बीच व्हाट्सएप के जरिए कॉल आए। ठगों ने खुद को पुलिस और बड़ी जांच एजेंसियों का अफसर बताया। उन्होंने पीड़ित पर निम्नलिखित आरोप लगाकर डराया और उनके आधार कार्ड का उपयोग कर मुंबई में फर्जी खाता खोला गया है।
इस खाते के जरिए टेरर फंडिंग (आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन) की जा रही है।
पीड़ित पर अश्लील वीडियो और चैट से जुड़े झूठे आरोप भी मढ़े गए।
दो घंटे तक 'डिजिटल अरेस्ट' और मानसिक प्रताड़ना
ठगों ने पीड़ित को दो घंटे तक वीडियो कॉल पर रखा और कमरा बंद करने का आदेश दिया। उन्हें डराया गया कि वे 'डिजिटल अरेस्ट' में हैं और किसी भी परिजन से यह जानकारी साझा न करें। घबराए हुए बुजुर्ग ने ठगों के कहे अनुसार दो बार में (26 लाख और 5 लाख रुपये) कुल 31 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। ठगों ने भरोसा दिया कि आरबीआई (RBI) जांच के बाद यह पैसा वापस कर देगा।
बच्ची की सतर्कता से खुला मामला
इस पूरी घटना का खुलासा तब हुआ जब घर की एक बच्ची ने बुजुर्ग के फोन पर आए मैसेज देख लिए और परिजनों को इसकी जानकारी दी। ठगी का एहसास होने पर पीड़ित ने साइबर क्राइम पोर्टल और स्थानीय कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई। शुक्रवार को पीड़ित ने पुलिस कप्तान ओम प्रकाश सिंह से मिलकर न्याय की गुहार लगाई।
पुलिस और प्रशासन का रुख
"पीड़ित की शिकायत मिली है। मामले को साइबर सेल को सौंप दिया गया है। पीड़ित की हर संभव मदद की जाएगी और अपराधियों को पकड़ने का प्रयास जारी है।"
कासगंज एसपी ओम प्रकाश सिंह ने जनता से अपील की है कि वे इन बातों का ध्यान रखें:
कोई भी सरकारी एजेंसी व्हाट्सएप कॉल पर 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कार्रवाई नहीं करती।
कभी भी डर या दबाव में आकर किसी अनजान खाते में पैसे ट्रांसफर न करें।
ऐसे कॉल आने पर तुरंत अपने परिवार और 1930 (साइबर हेल्पलाइन) पर सूचित करें।

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