Lucknow news:यूपी के आंगनबाड़ी केंद्रों का होगा कायाकल्प: अब प्री-प्राइमरी स्कूलों की तरह 'स्मार्ट' बनेंगे भवन

 यूपी के आंगनबाड़ी केंद्रों का होगा कायाकल्प: अब प्री-प्राइमरी स्कूलों की तरह 'स्मार्ट' बनेंगे भवन



 रिपोर्ट मोरध्वज कुमार डायरेक्टर

    UP R भारत एक्सप्रेस न्यूज़


​लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की भावी पीढ़ी की नींव को मजबूत करने के उद्देश्य से आंगनबाड़ी केंद्रों को लेकर एक बड़ी पहल की है। राजधानी लखनऊ में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को अब उनके स्वयं के सुरक्षित और आधुनिक भवनों में संचालित किया जाएगा।

​प्रमुख निर्देश और कार्ययोजना

​मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं, जिसमें निम्नलिखित बिंदुओं पर जोर दिया गया है:

​स्वयं के भवन का निर्माण: जिन केंद्रों के पास वर्तमान में अपनी जमीन या भवन नहीं है, उनका निर्माण प्राथमिकता के आधार पर कराया जाएगा।

​प्री-फैब्रिकेटेड मॉडल: समय और लागत की बचत के लिए मुख्यमंत्री ने 'प्री-फैब्रिकेटेड' (तेजी से तैयार होने वाले ढांचे) मॉडल पर विचार करने और एक मानक डिजाइन तैयार करने को कहा है।

​प्राथमिक विद्यालयों के साथ एकीकरण: जहाँ संभव हो, आंगनबाड़ी भवन प्राथमिक विद्यालयों के प्रांगण में ही बनाए जाएंगे। इससे बच्चों को शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य सेवाएं एक ही छत के नीचे मिल सकेंगी।

​वित्तीय मॉडल: इन भवनों के निर्माण के लिए CSR (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) के माध्यम से निजी क्षेत्र का सहयोग लिया जाएगा, साथ ही राज्य सरकार भी आवश्यक वित्तीय सहायता प्रदान करेगी।

​'स्वस्थ बचपन-समर्थ उत्तर प्रदेश' का संकल्प

​मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बैठक में कहा कि 3 से 6 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए ये केंद्र प्री-प्राइमरी स्कूल के रूप में कार्य करते हैं। इसलिए इन्हें केवल एक सरकारी भवन न मानकर, बच्चों के विकास के लिए आकर्षक, सुरक्षित और बाल-मित्र (Child-friendly) बनाया जाना चाहिए।

​"आंगनबाड़ी केंद्र केवल एक इमारत नहीं हैं, बल्कि ये हमारी भावी पीढ़ी की सुदृढ़ नींव हैं। बच्चों और गर्भवती माताओं को आधुनिक सुविधाएं देना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।" — योगी आदित्यनाथ, मुख्यमंत्री

​मिशन का लक्ष्य

​इस मिशन का उद्देश्य आंगनबाड़ी ढांचे को पूरी तरह रूपांतरित करना है, ताकि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बच्चों को निजी स्कूलों जैसा परिवेश मिल सके। यह कदम 'स्वस्थ बचपन-समर्थ उत्तर प्रदेश' के संकल्प को नई गति प्रदान करेगा।

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